पेयजल विभाग के पूर्व महाप्रबंधक व पूर्व ओएसडी जीडी रतूड़ी को पत्नी शोक
देहरादून। इंजीनियर गोपाल दत्त रतूड़ी की धर्मपत्नी सावित्री भट्ट रतूड़ी उम्र 69 वर्ष का यहां अपने आवास पर स्वर्गवास हो गया। उन्हें हृदय गति की बीमारी के कारण हिमालय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने जीवन की अंतिम सांस अपने निजी आवास बद्रीपुर जोगीवाला में ली। उनका पार्थिव शव अंतिम दर्शनों के लिए अपने निजी निवास पर रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में उनके शुभचिंतकों और सगे संबंधियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद मैथानी ने उन्हें मातृ शक्ति का प्रतीक बताते हुए और महिलाओं के जीवन से जुड़ी समस्याओं के लिए सदैव सजग रहने वाली महिला बताते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए। देवप्रयाग विकासखंड के सिंगोली गांव की मूल निवासी इंजीनियर जीडी रतूड़ी की धर्मपत्नी सावित्री देवी का हृदय की बीमारी के कारण यहां हिमालय हॉस्पिटल में देहांत हुआ, जहां डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली वह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। उनकी चार बेटियां और एक बेटा है समाज सेवा और महिला उत्थान के लिए सजग रही है। उत्तराखंड आंदोलन में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। सिद्दपीठ चन्द्रबदनी मंदिर के पुजार गांव निवासी पंडित रामेश्वर प्रसाद भट्ट की बड़ी बेटी रही सावित्री देवी मेधावी और महिला सशक्तिकरण की प्रबल हिमायती रही हैं। उनके पति इंजीनियर जीडी रतूड़ी पेयजल विभाग में महाप्रबंधक के पद पर रहे और शिक्षा विभाग में भी रहे। उनकी गिनती एक ईमानदार और कुशल अधिकारी के रूप में की जाती थी। रतूड़ी परिवार को पिछले कुछ दिनों से पारिवारिक लोगों की दुखद मृत्यु के कारण परेशानी झेलनी पड़ी, उनके बहनोई सूबेदार काशीराम बडोनी ग्राम सिलोड का निधन हुआ और उसके बाद उनके उनके साले पुजार गांव निवासी समाजसेवी नंदकिशोर भट्ट का भी आकस्मिक निधन हुआ। रतूड़ी परिवार के लिए यह एक दुखद समय रहा है और पत्नी के न होने से उन्हें गहरा सदमा लगा है। उन्हें एक आदर्श दंपत्ति के रूप में जाना जाता था। उनके नजदीकी इंद्र भूषण बडोनी ने बताया कि कल हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर सुबह उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शव यात्रा बद्रीपुर जोगीवाला से सुबह 9 बजे हरिद्वार के लिए प्रस्थान करेगी।