गैरसैंण के विकास को लेकर भाजपा के भीतर की रार खुलकर आई सामने
गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के विकास के मुद्दों को लेकर प्रदेश सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है। सोमवार को भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कर्णप्रयाग के वर्तमान भाजपा विधायक अनिल नौटियाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए वर्तमान विधायक की तुलना कुंभकर्ण से कर दी। साथ ही नौकरशाही पर गैरसैंण के विकास में जानबूझकर अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया।
सोमवार को गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी का गुस्सा वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल पर जमकर फूटा। उन्होंने कहा कि गैरसैंण विधानसभा और क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद के साथ विधायक चुना था, उस पर पानी फिर गया है।
सुरेंद्र नेगी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गैरसैंण के चैमुखी विकास के लिए 5 से 6 प्रमुख मांगें तैयार की थीं, जिन्हें लेकर पिछले पांच सालों में विधायक अनिल नौटियाल को लगातार कई पत्र लिखे गए। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायक ने इन पांच सालों में एक भी पत्र का संज्ञान नहीं लिया और न ही किसी सार्वजनिक मंच या सरकार के सामने इन बुनियादी मांगों को उठाया। पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने साल 2017 के घटनाक्रमों को याद करते हुए कहा कि जब वे विधायक बने थे, तब गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए जी-जान से प्रयास किए गए थे।
उस समय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई थी। तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण राजधानी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 सालों के भीतर 25 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का ऐतिहासिक ऐलान किया था।
उन्होंने कहा कि इस भारी-भरकम बजट के तहत गैरसैंण में एक विशाल कृत्रिम झील का निर्माण, प्रतिष्ठित भाषा संस्थान की स्थापना और एक अत्याधुनिक मिनी सचिवालय का निर्माण किया जाना तय हुआ था, लेकिन आज हकीकत ये है कि इन बड़ी योजनाओं पर एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ पाया है।
यदि सरकार ने हर साल के बजट में इस घोषित राशि का आनुपातिक प्रावधान किया होता, तो आज तक साढ़े 12 हजार करोड़ रुपए गैरसैंण परिक्षेत्र के विकास पर खर्च हो चुके होते और यहां की तस्वीर बदल गई होती। मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने सूबे की नौकरशाही पर जमकर हमला किया। सुरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड की ब्यूरोकेसी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उत्तराखंड के बड़े अधिकारी पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते हैं. वे देहरादून के एसी कमरों से बाहर नहीं निकलना चाहते। इसलिए जानबूझकर गैरसैंण के प्रोजेक्ट्स को लटकाया जा रहा है। सुरेंद्र नेगी ने सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि साल 2015 में तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही गैरसैंण में मिनी सचिवालय के निर्माण को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी थी. इसके लिए 53 करोड़ रुपए की भारी धनराशि भी स्वीकृत की गई थी।
इतना ही नहीं भारत सरकार के उपक्रम और निर्माणदायी संस्था वापकोस को शुरुआती काम के लिए साल 2015 में ही 3 करोड़ रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी गई थी। मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए केवल भूमि का हस्तांतरण होना शेष था, लेकिन बड़े अफसरों की घोर लापरवाही के कारण 11 साल बीत जाने के बाद भी आज तक जमीन का ट्रांसफर नहीं हो सका है।
पूर्व विधायक सुरेंद्र नेगी ने आर्थिक नुकसान की बात उठाते हुए कहा कि अधिकारियों की इस सुस्ती की वजह से जो सचिवालय 11 साल पहले 53 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हो जाना था, उसकी निर्माण लागत आज बढ़कर 80 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है।
यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और राज्य की जनता के साथ बड़ा धोखा है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिस भी आईएएस या विभागीय अधिकारी की लापरवाही के कारण यह प्रोजेक्ट 11 साल से अटका हुआ है, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर मौजूदा बीजेपी विधायक अनिल नौटियाल ने अपना पक्ष रखा। साथ ही पूर्व बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी के आरोपों पर भी जवाब दिया। विधायक नौटियाल ने कहा कि सुरेंद्र सिंह नेगी हमारे वरिष्ठ नेता हैं और बड़े भाई हैं। वे पार्टी से विधायक रहे हैं। पार्टी ने हर सम्मान उनको दिया है। उन्होंने किस कारण आरोप लगाए हैं, यह समझ से परे है. कहां कि बात वो कह रहे हैं, उनसे इस संबंध में जरूर पूछेंगे।