मनुष्य के दुःख का सबसे बड़ा यही है कि वो स्वयं को घर का स्वामी मानता हैः आचार्य महामाया प्रसाद
देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति के तत्वावधान में शिव शक्ति मंदिर सरस्वती विहार अजबपुर खुर्द में शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा कि मनुष्य की पद-प्रतिष्ठा, धन-वैभव, यश कीर्ति और संतान,जगह जमीन सब परमात्मा की कृपा से ही प्राप्त हुई है। पर संसारी जीव इतना अज्ञानी है कि इस संसार की समस्त लौकिक वस्तुओं को स्वयं का मान बैठा है, घर परिवार का मालिक स्वयं बना हुआ है। भगवान शिव के गृहपति अवतार की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि मनुष्य के दुःख का सबसे बड़ा यही है कि वो स्वयं को घर का स्वामी मानता है आज से स्वयं को घर का व्यवस्थापक (मैनेजर) मान लो और भगवान शिव को घर का मालिक बना दो ऐसा विचार करने से सारे घर परिवार की चिंता महादेव करेंगे और जीव चिंता मुक्त होकर परम आनंद को प्राप्त कर लेगा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चैहान उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी सचिव गजेंद्र भंडारी मंदिर संयोजक मूर्ति राम बिजल्वाण, सह संयोजक दिनेश जुयाल, कोषाध्यक्ष विजय सिंह रावत, मंगल सिंह कुट्टी, जयप्रकाश सेमवाल, चिंतामणि पुरोहित, बसंत सिंह दफोनी, बीपी शर्मा, पीएल चमोली, जयपाल सिंह बर्तवाल, आशीष गुसांईं, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, कैलाश रमोला, वेद किशोर शर्मा आदि उपस्थित थे।